इस्पात की मांग बढ़ने पर उड़ीसा निवास के लिहाज़ से एक महत्वपूर्ण जगह के रूप में उभरा।
उड़ीसा में लौह अयस्क का एक विशाल भंडार था।
उड़ीसा की राज्य सरकार ने इस्पात की इस अप्रत्याशित मांग को बेचना चाहा। उसने अंतर्राष्ट्रीय इस्पात-निर्माताओं और राष्ट्रीय इस्पात-निर्माताओं के साथ एक सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किये। इसका उद्देश्य राज्य में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना था।
सरकार का मानना था की इससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सामने आएंगे।
लोह अस्यक के ज्यादातर भण्डार उड़ीसा के सवार्धिक अविकसित इलाको में थे।
आदिवासियों को डर था की उधोगो की वजह से उन्हें अपने घरो को छोड़ कर जाना होगा। तथा पर्यावरणवादीयो का मानना था की इससे पर्यावरण को भी प्रदूषित होगा।
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